मुंगेली – त्यौहारों का सीजन शुरू होते ही शहर में तेज आवाज और बेहिसाब बेस वाले डीजे का शोर बढ़ने लगा है। नियमों के तहत डीजे संचालन के लिए मापदंड निर्धारित हैं और प्रशासन द्वारा अनुमति देते समय संचालकों को निर्धारित नियमों का पालन करने की हिदायत भी दी जाती है। इसके बावजूद कई आयोजनों में इन निर्देशों की अनदेखी होती दिखाई दे रही है। ऐसे में अब प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि डीजे संचालकों को अनुमति देने के दौरान नियमों की जानकारी दी जाती है, तो फिर आयोजन के दौरान उनकी निगरानी कौन करता है? क्या प्रशासन के पास ध्वनि स्तर की जांच के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है? यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार संचालकों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?

खासकर देर शाम और रात के समय तेज आवाज में बजने वाले डीजे से आसपास के रहवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बुजुर्गों, बच्चों, विद्यार्थियों और मरीजों के लिए यह शोर परेशानी का कारण बन रहा है। इसके बावजूद शिकायतों के बाद भी यदि स्थिति में बदलाव नहीं आता, तो कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
सवाल यह भी है कि जब नियम और मापदंड पहले से तय हैं, तो उनके पालन की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या प्रशासन केवल अनुमति जारी करने तक सीमित रहेगा या नियमों का पालन कराने के लिए मौके पर भी निगरानी करेगा?

त्यौहारों की आड़ में ध्वनि प्रदूषण बढ़ने से पहले प्रशासन को डीजे संचालकों पर प्रभावी निगरानी और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। लोगों का कहना है कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों की खुशी बरकरार रहे, लेकिन इसकी कीमत आम नागरिकों की शांति और स्वास्थ्य से नहीं चुकाई जानी चाहिए।

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