मुंगेली – प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जनभागीदारी और संवेदनशील सहयोग से टीबी उन्मूलन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है। जिले के ग्राम रोहराखुर्द निवासी 35 वर्षीय श्रीमती उर्मिला घोसले ने नियमित उपचार, पौष्टिक आहार और स्वास्थ्य विभाग की सतत निगरानी के बल पर टीबी को मात देकर स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाया है। उनकी इस सफलता में निक्षय मित्र डॉ. मनीष बंजारा का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा।
उर्मिला पिछले एक माह से खांसी और बुखार से पीड़ित थीं। मितानिन श्रीमती संतोषी दिवाकर के संपर्क में आने के बाद उन्होंने जिला अस्पताल मुंगेली के टीबी विभाग में बलगम की जांच कराई। जांच में टीबी की पुष्टि होने बाद डीएस-टीबी उपचार प्रारंभ किया गया। उर्मिला की परिस्थितियों को देखते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पदमपुर के चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष बंजारा ने प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत उन्हें निक्षय मित्र के रूप में गोद लेकर सहयोग करने का निर्णय लिया। डॉ. बंजारा ने उर्मिला की स्वास्थ्य स्थिति की नियमित जानकारी लेते हुए उन्हें प्रत्येक माह प्रोटीन युक्त पोषण आहार उपलब्ध कराया। इसके साथ ही समय-समय पर घर पहुंचकर मितानिन एवं सीनियर टीबी सुपरवाइजर के सहयोग से स्वास्थ्य जांच और वजन की निगरानी की गई।
लगातार छह माह तक नियमित उपचार, पौष्टिक आहार और स्वास्थ्य विभाग की सतत निगरानी का सकारात्मक परिणाम सामने आया। उर्मिला के स्वास्थ्य में निरंतर सुधार हुआ और उपचार पूर्ण होने के बाद जिला अस्पताल मुंगेली में आवश्यक जांच कराई गई, जिसमें उनके टीबी से स्वस्थ होने की पुष्टि हुई। उर्मिला की कहानी यह संदेश देती है कि समय पर जांच, चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित उपचार, पौष्टिक आहार और परिवार एवं समाज के सहयोग से टीबी से मुक्ति संभव है। टीबी से स्वस्थ होने के बाद श्रीमती उर्मिला घोसले ने प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने निक्षय मित्र डॉ. मनीष बंजारा, जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग को उपचार, पोषण एवं सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए लोगों से स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर समय पर जांच कराने की अपील की।
डॉ. मनीष बंजारा ने बताया कि टीबी का समय पर पता लगने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित एवं पूरा उपचार लेने से मरीज स्वस्थ हो सकता है। लंबे समय तक खांसी, बुखार अथवा टीबी से संबंधित लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य केन्द्र में जांच कराना जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि टीबी की पुष्टि होने पर दवाओं का नियमित सेवन करें और उपचार का कोर्स बीच में न छोड़ें।

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