मुंगेली – जिले में इन दिनों सिगरेट और राजश्री जैसे प्रसिद्ध पान मसाला उत्पादों की कालाबाजारी ने आम उपभोक्ताओं और छोटे दुकानदारों की कमर तोड़ दी है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से कहीं अधिक ऊंचे दामों पर इन उत्पादों की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। हैरत की बात यह है कि इस पूरी अवैध वसूली का मुख्य केंद्र बड़े थोक विक्रेता बने हुए हैं, जो कृत्रिम किल्लत पैदा कर अवैध मुनाफाखोरी कर रहे हैं।
दामों में भारी उछाल: उपभोक्ता परेशान
स्थानीय उपभोक्ताओं से मिली शिकायतों के अनुसार, जिस राजश्री पाउच की कीमत पैकेट पर निर्धारित अंकित डॉ से लगभग 40 से 50 रुपए तक अधिक में बेचा जा रहा है। यही हाल सिगरेट का भी है, जहाँ हर ब्रांड पर प्रति डिब्बी लगभग 10 से 20 रुपए अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं। छोटे फुटकर व्यापारियों का कहना है कि उन्हें थोक विक्रेताओं से ही माल ऊंचे दामों पर मिल रहा है, जिसके कारण वे इसे एमआरपी पर बेचने में असमर्थ हैं।
थोक विक्रेताओं का ‘सिंडिकेट’ और कालाबाजारी
सूत्रों के अनुसार, मुंगेली के कुछ बड़े थोक व्यापारियों ने एक गुप्त सिंडिकेट बना लिया है। ये व्यापारी माल का स्टॉक (Hoarding) कर लेते हैं और बाजार में मांग बढ़ने पर ‘सप्लाई कम है’ का बहाना बनाकर माल को ऊंचे दामों पर निकालते हैं।
बिना बिल का खेल: मिली जानकारी के अनुसार अधिकांश लेन-देन कच्चे बिलों या बिना बिल के हो रहे हैं ताकि टैक्स चोरी के साथ-साथ अधिक कीमत का कोई प्रमाण न रहे।
“हम गरीब दुकानदार हैं। अगर हम थोक वाले से रेट कम करने को कहते हैं, तो वह माल देने से मना कर देता है। ग्राहकों की गालियां हमें सुननी पड़ती हैं, जबकि असली मुनाफा ऊपर वाले कमा रहे हैं। थोक विक्रेता दुकानदारों पर दबाव डालते हैं कि अगर उन्हें राजश्री या सिगरेट चाहिए, तो उन्हें अन्य कम बिकने वाले उत्पाद भी खरीदने होंगे।”
— एक स्थानीय गुमटी संचालक
इस पुरे मामले पर अधिकारी अनुसार समानो मे लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है,, वही कालाबाजारी को लेकर कहा कि जांच कर कार्यवाही की जाएगी।
निष्कर्ष और मांग
मुंगेली की जनता ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से मांग की है कि तंबाकू उत्पादों के गोदामों पर छापेमारी की जाए और एमआरपी का उल्लंघन करने वाले थोक व चिल्हर व्यापारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि जल्द ही इन पर लगाम नहीं कसी गई, तो उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण इसी तरह जारी रहेगा।

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