मुंगेली — “तू डाल-डाल, मैं पात-पात” की कहावत इन दिनों मुंगेली नगर पालिका परिषद पर बिल्कुल सटीक बैठती नजर आ रही है। नगर विकास की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, वे कंधे इन दिनों फोटो सेशन, बैठकों और बयानबाज़ी में ही व्यस्त दिख रहे हैं, जबकि वार्डों की जनता पानी, सड़क, सफाई और प्रकाश जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए पालिका के चक्कर काटने को मजबूर है।
आरोप–प्रत्यारोप के इस राजनीतिक अखाड़े में ताज़ा मामला सभापतियों और पीआईसी (प्रेसिडेंट इन काउंसिल) गठन को लेकर सामने आया है। नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा सभापतियों की सूची पालिका अधिकारी को सौंपे जाने के बाद भी मामला “जांच जारी है” के दायरे से बाहर नहीं निकल पा रहा। कागज आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन ज़मीनी कार्रवाई अब भी ठहरी हुई है।
गौरतलब है कि बीते दिनों पीआईसी का गठन बड़े उत्साह के साथ किया गया था, लेकिन यह उत्साह महज 24 घंटे में ही ठंडा पड़ गया, जब पार्षदों के इस्तीफे सामने आने लगे। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हुई, मान–मनौव्वल का दौर चला और अंततः कांग्रेस के अधिकांश पार्षदों ने अपने इस्तीफे वापस ले लिए। हालांकि वरिष्ठ कांग्रेस पार्षद अरविंद वैष्णव और संजय चंदेल अपने फैसले पर अडिग रहे, जिससे स्थिति और अधिक उलझ गई।
पूरे घटनाक्रम पर नगर पालिका अधिकारी होरी सिंह ठाकुर का कहना है कि इससे पहले भी दो बार पीआईसी गठन की प्रक्रिया पार्षदों के इस्तीफों की भेंट चढ़ चुकी है। अब एक बार फिर अध्यक्ष द्वारा पीआईसी गठन की सूचना दी गई है, जिस पर नियमानुसार जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
नगर पालिका में चल रही इस उठा–पटक ने न केवल राजनीतिक पारा चढ़ा दिया है, बल्कि आम जनता की उम्मीदों को भी अधर में लटका दिया है। सवाल यही है कि नगर विकास की गाथा इस बार धरातल पर उतरेगी या फिर पूर्व कार्यकालों की तरह फाइलों और कागजों में ही सिमटकर रह जाएगी।

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