मुंगेली में कॉलोनियों की जगह अब बने-बनाए घर बेचने का चलन, नियमों के पालन पर सवाल
मुंगेली – जिले में इन दिनों बड़े नगरों और महानगरों की तर्ज पर विकसित की जा रही कॉलोनियों तथा बने-बनाए घरों की बिक्री का चलन बढ़ रहा है। अपने घर का सपना देखने वाले लोगों के लिए यह अवसर खुशी का कारण हो सकता है, लेकिन ऐसे प्रोजेक्ट संचालित करने वालों द्वारा सरकारी नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
शासन-प्रशासन ने कॉलोनी विकसित करने वाले बिल्डरों और कॉलोनाइजरों के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित किए हैं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएमसी) तथा रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) अधिनियम, 2016 (रेरा) के प्रावधानों का पालन करने के बाद ही किसी कॉलोनाइजर को जमीन विकसित कर बेचने या आवासीय प्रोजेक्ट संचालित करने का अधिकार मिलता है। हालांकि, किसी परियोजना पर नियमों के उल्लंघन का निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी की जांच और अभिलेखों के आधार पर ही निकाला जा सकता है। इसके बावजूद कई स्थानों पर नियमों की अनदेखी किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
वर्ष 2012 में मुंगेली जिला बनने के बाद जमीन की खरीद-बिक्री में तेजी आई। कई लोगों ने किसानों से कम कीमत पर जमीन खरीदकर जरूरतमंदों को ऊंचे दामों पर बेची। प्रचार के दौरान पक्की सड़क, नाली, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया गया, लेकिन कुछ मामलों में बिक्री के बाद खरीदारों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिलने की शिकायतें सामने आईं। इन शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभागीय जांच के बाद ही हो सकती है, फिर भी ऐसी स्थिति में लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ सकता है।
ऐसी शिकायतों के बाद प्रशासन ने अनियमित तरीके से जमीन बेचने वालों पर कार्रवाई और निगरानी बढ़ाई। अब कुछ लोगों द्वारा भूखंड बेचने के बजाय बने-बनाए घरों की बिक्री पर जोर दिया जा रहा है। इससे यह जरूरी हो जाता है कि खरीदार केवल विज्ञापन या मौखिक आश्वासन पर निर्भर न रहें। उन्हें नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से लेआउट और विकास अनुमति, संबंधित नगर निकाय या ग्राम पंचायत से भवन अनुज्ञा और पूर्णता या अधिभोग प्रमाणपत्र, तहसील या पंजीयन विभाग से भूमि स्वामित्व, खसरा, नक्शा, बंधक और विवाद की स्थिति, तथा रेरा की वेबसाइट पर परियोजना का पंजीयन और स्वीकृत विवरण जांचना चाहिए। साथ ही, भूमि उपयोग, डायवर्जन, रास्ते के अधिकार, बिजली-पानी के वैध कनेक्शन, जल निकासी, सड़क की वास्तविक स्थिति, साझा सुविधाओं के रखरखाव और बिक्री अनुबंध की शर्तों की भी लिखित पुष्टि करनी चाहिए। जहां रेरा लागू हो, वहां परियोजना का पंजीयन, प्रमोटर का विवरण, स्वीकृत योजना और समयसीमा देखना आवश्यक है; छोटे या कानून के दायरे से बाहर होने का दावा करने वाली परियोजनाओं में भी संबंधित प्राधिकारी से लिखित स्थिति स्पष्ट कराना उचित होगा।
जोर शोर से चल रहा प्रचार प्रसार – जिले मेँ इन दिनों ऐसे एजेंटो की आफिसो से सोशल मीडिया पर जोर शोर से प्रचार किया जा रहा हैं,, समय बे समय आने वाले फोन कालो को ले कर लोग उत्साहित हो कर ऐसे लोगो के चुंगल मेँ फस जाते हैं,, जैसे जैसे त्योंव्हारी सीजन पास आ रहा हैं उनके प्रचार प्रसार मेँ भी तेजी देखी जा रही हैं.
प्रशासनिक स्तर पर कलेक्टर कार्यालय, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग, संबंधित नगर पालिका या ग्राम पंचायत, तहसील कार्यालय, पंजीयन विभाग और छत्तीसगढ़ रेरा को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में नियमित निरीक्षण और अभिलेखों का मिलान करना चाहिए। शिकायत मिलने पर स्वीकृत नक्शे, भूमि उपयोग, विकास अनुमति, भवन अनुज्ञा, रेरा पंजीयन, विज्ञापित सुविधाओं और मौके की स्थिति की जांच की जानी चाहिए। खरीदारों को भुगतान से पहले दस्तावेजों की स्वतंत्र कानूनी जांच करानी चाहिए और रसीद, स्वीकृत नक्शा, अनुबंध तथा सुविधा संबंधी वादों का लिखित रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए। इससे लोगों का घर का सपना किसी नए धोखे में बदलने से बच सकता है और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जिम्मेदारी भी तय की जा सकेगी।

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