मुंगेली – जिले में इन दिनों जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधियों का बढ़ता हस्तक्षेप और कथित दबाव चर्चा का विषय बना हुआ है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की तुलना में उनके प्रतिनिधि ही निर्णय लेने की स्थिति में नजर आ रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ रहा है।
ज्ञात हो कि शासन द्वारा पूर्व मे आदेश जारी किया गया था कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि ही बैठकों मे हिस्सा लेगे किन्तु शासन के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए निर्वाचित प्रतिनिधियों के स्थान पर प्रतिनिधि उनका प्रतिनिधित्व करते है।
महिलाओ का प्रतिनिधित्व महज नाम मात्र का – एक तरफ जहाँ महिलाओ को बराबरी का दर्जा देने की बात कही जाती है देश के मुखिया भी महिलाओ को आगे बढ़ाने के पक्षधर है, किन्तु ये सभी बाते महज कपोल कल्पना बन कर रह गईं है, जिन जगहों पर महिला जनप्रतिनिधि निर्वाचित हुई है वहा का ज्यादातर नेतृत्व उनके प्रतिनिधि के रूप मे पति या पुत्र हीं करते है,, प्रतिनिधि का काम महज हस्ताक्षर तक हीं सिमित रहता है.
मिली जानकारी के अनुसार, विभिन्न पंचायतों में विकास कार्यों के लिए स्वीकृत निधि पर 15 से 20 प्रतिशत तक कमीशन की मांग किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। इस कथित दबाव के चलते पंचायत प्रतिनिधियों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है कि वे जनहित के कार्यों को किस प्रकार निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरा कराएं।
नाम गोपनीय रखने की शर्त पर एक सरपंच ने बताया कि जैसे ही किसी कार्य के लिए राशि जारी होती है, वैसे ही संबंधित प्रतिनिधियों द्वारा अपने हिस्से के कमीशन को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया जाता है। इससे न केवल विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि पंचायतों में भय और असहजता का माहौल भी बन रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस स्थिति को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह दबाव और कमीशनखोरी जारी रही, तो विकास कार्यों की गुणवत्ता और गति दोनों प्रभावित होंगी। साथ ही, ईमानदारी से काम करने वाले जनप्रतिनिधियों के लिए भी काम करना मुश्किल होता जा रहा है।
फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह न केवल स्थानीय प्रशासन के लिए बल्कि पूरे जिले की व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और पंचायत स्तर पर पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाती है।

The News Related To The News Engaged In The Sangwari Chhattisgarh Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.
