नगर पालिका की सामान्य सभा में अतिक्रमण पर घमासान, पार्षद ने किया बहिष्कार
मुंगेली – नगर पालिका परिषद मुंगेली की सामान्य सभा की बैठक में शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था और मुख्य सड़कों पर लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। सड़क और फुटपाथ पर दुकानदारों के कब्जे को लेकर पार्षदों ने नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उचित कार्रवाई नहीं होने से नाराज पार्षद विनय चोपड़ा अपने पार्षदों के साथ सामान्य सभा की बैठक का बहिष्कार करते हुए सदन से बाहर निकल गए। इससे बैठक में कुछ समय के लिए सरगर्मी बढ़ गई।
सड़क तक फैली दुकानें, राहगीरों की बढ़ी परेशानी
पार्षदों का आरोप है कि शहर के कई प्रमुख मार्गों पर दुकानदारों ने अपनी दुकानों का सामान फुटपाथ से आगे सड़क तक फैला रखा है। कई स्थानों पर अस्थायी दुकानें और ठेले भी सड़क किनारे संचालित हो रहे हैं। इसके कारण सड़कों की चौड़ाई कम हो गई है और आवागमन प्रभावित हो रहा है।
व्यस्त क्षेत्रों में दिनभर वाहनों की आवाजाही के बीच सड़क पर अतिक्रमण होने से जाम की स्थिति निर्मित होती है। पैदल चलने वाले लोगों को फुटपाथ उपलब्ध नहीं होने के कारण सड़क पर चलना पड़ता है। इससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
कार्रवाई के नाम पर नोटिस और आश्वासन
बैठक में पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका प्रशासन अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर नोटिस जारी करने और आश्वासन देने तक सीमित है। धरातल पर प्रभावी और स्थायी अभियान नहीं चलाया जा रहा है। कई बार कार्रवाई के बाद भी दोबारा उसी स्थान पर कब्जा होने से पालिका की कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
पार्षद विनय चोपड़ा ने सदन से बाहर निकलने के बाद नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि शहर की जनता रोजाना जाम और अव्यवस्था से परेशान है। जनप्रतिनिधियों द्वारा बार-बार समस्या उठाने के बावजूद यदि स्थिति में सुधार नहीं होता तो सामान्य सभा में विरोध दर्ज कराना जरूरी हो जाता है।
शिकायतों के बाद भी नहीं निकला स्थायी समाधान
शहरवासियों की ओर से भी मुख्य मार्गों और फुटपाथ पर अतिक्रमण को लेकर लगातार शिकायतें किए जाने की बात सामने आई है। लोगों का कहना है कि सड़क किनारे दुकानें और सामान फैलने से आवागमन मुश्किल हो गया है। बाजार क्षेत्र में स्थिति विशेष रूप से गंभीर हो जाती है।
लोगों का सवाल है कि नगर पालिका के पास अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी होने के बावजूद समस्या लगातार क्यों बढ़ रही है। यदि अतिक्रमण हटाने के बाद दोबारा कब्जा किया जाता है तो संबंधित लोगों पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?
सामान्य सभा से पार्षदों का बाहर निकलना बना चर्चा का विषय
अतिक्रमण के मुद्दे पर नाराज होकर पार्षदों का सामान्य सभा से बाहर निकलना नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस घटनाक्रम के बाद नगर पालिका प्रशासन की कार्यशैली और अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
पार्षदों का कहना है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि शहर की सार्वजनिक सड़कों और फुटपाथ को अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए है। उनका उद्देश्य आम नागरिकों के लिए सुरक्षित और सुगम आवागमन सुनिश्चित करना है।
यातायात व्यवस्था पर भी असर
शहर में बढ़ते अतिक्रमण का सीधा असर यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है। सड़क किनारे दुकानें, ठेले और सामान रखे जाने से कई जगह सड़क संकरी हो जाती है। इसके कारण वाहन चालकों को परेशानी होती है और कई बार यातायात की स्थिति बिगड़ जाती है।
पैदल राहगीरों के लिए भी स्थिति परेशानी वाली है। फुटपाथ पर कब्जे के कारण उन्हें सड़क से होकर गुजरना पड़ता है। इससे विशेषकर व्यस्त मार्गों पर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
पालिका की कार्रवाई पर उठे सवाल
सामान्य सभा में उठे विरोध ने नगर पालिका प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि अतिक्रमण शहर की यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है तो इसे हटाने के लिए नियमित अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा? कार्रवाई के बाद दोबारा कब्जा होने से रोकने के लिए क्या व्यवस्था है? शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पा रहा?
नगरवासियों का कहना है कि केवल नोटिस जारी करने से समस्या खत्म नहीं होगी। पालिका को मुख्य मार्गों का सर्वे कर अतिक्रमण चिन्हित करने, कार्रवाई करने और दोबारा कब्जा रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनानी होगी।
अब देखना होगा, कार्रवाई होती है या मामला ठंडे बस्ते में
सामान्य सभा में हुए विरोध के बाद अब नगरवासियों की नजर नगर पालिका प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। क्या शहर के मुख्य मार्गों और फुटपाथ को अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा या फिर मामला एक बार फिर बैठक और आश्वासन तक सीमित रह जाएगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
फिलहाल सामान्य सभा में अतिक्रमण को लेकर सामने आया विरोध इस बात का संकेत है कि शहर की सड़क और फुटपाथ पर कब्जे का मुद्दा अब नगर पालिका की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल बन चुका है।

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