सम्पादकीय –
मुंगेली—आधुनिकता के दौर में पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कभी पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ और आमजन की बुलंद आवाज माना जाता था। शासन हो या प्रशासन, एक सशक्त कलम की ताकत को गंभीरता से लिया जाता था। पत्रकारिता का मूल उद्देश्य व्यवस्था की कमियों को सामने लाना, जनसमस्याओं को आवाज देना और समाज को वास्तविक स्थिति से अवगत कराना था।
लेकिन बदलते समय के साथ पत्रकारिता की भूमिका को लेकर चिंताये सताने लगी हैं। आज दौर में जनहित के मुद्दों की अपेक्षा प्रशासनिक गतिविधियों और उपलब्धियों को अधिक प्रमुखता मिलती दिखाई देती है। इससे पत्रकारिता की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े होते हैं।
वर्तमान दौर में पत्रकारों की सक्रियता भी कई अवसरों पर आयोजनों, समारोहों और त्योहारों तक सीमित नजर आती है। वहीं दूसरी ओर सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक लापरवाही जैसे आमजन से जुड़े मुद्दे अपेक्षित स्थान नहीं पा पाते। इससे वह वर्ग, जिसकी आवाज बनने की जिम्मेदारी पत्रकारिता पर है, स्वयं को उपेक्षित महसूस करने लगता है।
पत्रकारिता का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या प्रशासन का विरोध करना नहीं, बल्कि तथ्यों को सामने रखना है। जहां प्रशासन अच्छा कार्य करे, वहां उसकी सराहना होनी चाहिए, लेकिन जहां कमियां हों, वहां सवाल पूछना भी पत्रकारिता का धर्म है। लोकतंत्र में सत्ता और जनता के बीच संवाद बनाए रखने में निष्पक्ष मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि पत्रकारिता अपने मूल स्वरूप की ओर लौटे। खबरों में चमक-दमक से अधिक तथ्य, प्रचार से अधिक जनहित और व्यक्तिगत संबंधों से अधिक निष्पक्षता को महत्व मिले। क्योंकि पत्रकारिता की असली ताकत उसकी संख्या में नहीं, बल्कि उसकी विश्वसनीय कलम में होती है। जनता की आवाज बनकर ही पत्रकारिता अपने वास्तविक सम्मान और उद्देश्य को कायम रख सकती है।

The News Related To The News Engaged In The Sangwari Chhattisgarh Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.