
सेमी कंडक्टर उत्पाद की सीजी सेमी, दोनों इकाइयों से सालाना 4 अरब चिप्स के उत्पादन का लक्ष्य, करीब 7,500 करोड़ रुपये का निवेश
अहमदाबाद, 21 जुलाई 2026 – भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की नीतिगत पहल तथा उद्योग जगत के सहयोग से देश में एक मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित हो रहा है। गुजरात के साणंद क्षेत्र में स्थापित हो रही सीजी सेमी की दो विनिर्माण इकाइयों में कुल करीब 7,500 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। दोनों संयंत्रों के पूरी तरह संचालन में आने के बाद इनकी संयुक्त उत्पादन क्षमता प्रतिवर्ष करीब 4 अरब चिप्स होगी। यह जानकारी CG Semi, अहमदाबाद के चेयरमैन कार्यालय के वाइस प्रेसिडेंट संदीप कुमार सेन ने छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के अध्ययन दौरे के दौरान दी।
संदीप कुमार सेन ने बताया कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की क्षमता केवल विनिर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि देश पहले से ही वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत में वैश्विक स्तर पर होने वाले सेमीकंडक्टर डिजाइन का लगभग 20 प्रतिशत कार्य होता है। अब देश विनिर्माण क्षेत्र में भी अपनी क्षमता को मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास के लिए तकनीक, कुशल मानव संसाधन और मजबूत सप्लाई चेन तीन महत्वपूर्ण आधार हैं।
उन्होंने बताया कि सीजी सेमी ने जापान की कंपनी Renesas के साथ तकनीकी साझेदारी की है। सीजी सेमी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में मुख्य रूप से चिप डिजाइन तथा असेंबली और टेस्टिंग के क्षेत्र में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि तकनीकी साझेदारों के सहयोग से सीजी सेमी के कर्मचारियों को संबंधित इकाइयों में प्रशिक्षण देकर व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान किया जा रहा है।
सेन ने बताया कि सीजी सेमी की दोनों फैक्ट्रियां लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर स्थापित की जा रही हैं। दोनों इकाइयों के लिए लगभग एक लाख वर्ग मीटर क्षेत्र का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें करीब 40 हजार वर्ग मीटर का क्षेत्र क्लीन रूम के रूप में विकसित किया गया है। उन्होंने बताया कि सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए अत्यंत स्वच्छ और नियंत्रित वातावरण आवश्यक होता है। सामान्य वातावरण की तुलना में क्लीन रूम में हवा की शुद्धता कई गुना अधिक होती है, इसलिए उत्पादन प्रक्रिया में विशेष सुरक्षा और स्वच्छता प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है।
उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं में केंद्र सरकार की ओर से लगभग 50 प्रतिशत और राज्य सरकार की ओर से करीब 20 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता का प्रावधान है। गुजरात में उद्योगों के लिए उपलब्ध बुनियादी ढांचे और सरकारी सहयोग की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (GIDC) के माध्यम से उद्योगों को प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया गया है। औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि के साथ पानी, गैस और बिजली जैसी आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता तथा सिंगल विंडो व्यवस्था उद्योगों की स्थापना को सुगम बनाती है।
सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए बिजली की गुणवत्ता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए सेन ने कहा कि इस क्षेत्र में केवल पर्याप्त बिजली उपलब्ध होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वोल्टेज में मामूली उतार-चढ़ाव भी उत्पादन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसलिए अत्यधिक स्थिर और निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए उन्नत विद्युत प्रणालियों और यूपीएस जैसी व्यवस्थाओं की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार सेमीकंडक्टर विनिर्माण में बड़ी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाले शुद्ध जल की भी आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाले कई प्रमुख कच्चे माल, विशेष रसायन और उपकरण भारत में उपलब्ध नहीं हैं और उनका आयात किया जाता है। हालांकि, गुजरात के धोलेरा क्षेत्र में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास तथा देश में कच्चे माल और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन प्रयासों से भारत की विनिर्माण क्षमता और अधिक मजबूत होगी।
सीजी सेमी की परियोजना की प्रगति की जानकारी देते हुए सेन ने बताया कि परियोजना का ग्राउंड ब्रेकिंग मार्च 2024 में हुआ था। इसके बाद उत्पादन प्रक्रिया के परीक्षण, प्रोटोटाइप और क्वालिफिकेशन से जुड़े चरण पूरे किए गए। उन्होंने बताया कि सेमीकंडक्टर निर्माण में गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन प्रक्रिया का अत्यंत सटीक और नियंत्रित होना जरूरी है, क्योंकि प्रक्रिया में छोटी-सी त्रुटि भी बड़ी संख्या में चिप्स को प्रभावित कर सकती है। परियोजना में व्यावसायिक उत्पादन प्रारंभ हो चुका है।
सीजी सेमी के मानव संसाधन प्रमुख जोसेफ प्रेमराज ने बताया कि कंपनी ऑटोमोटिव, औद्योगिक और IoT सहित विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग होने वाले सेमीकंडक्टर उत्पादों के निर्माण पर ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत में उपलब्ध प्रशिक्षित इंजीनियर और तकनीकी मानव संसाधन इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण ताकत हैं। भारतीय तकनीकी प्रतिभाओं में नई तकनीकों को सीखने और अपनाने की क्षमता मजबूत है। आवश्यक प्रशिक्षण और कौशल विकास के माध्यम से देश सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए आवश्यक कुशल मानव संसाधन तैयार कर सकता है।
जोसेफ प्रेमराज ने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र भारत के लिए परिवर्तन के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। सरकार की नीतिगत पहल, तकनीकी साझेदारियों और कुशल मानव संसाधन के विकास के साथ भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण मानचित्र पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

The News Related To The News Engaged In The Sangwari Chhattisgarh Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.
