मुंगेली – कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देशानुसार एवं उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं, जिला मुंगेली डॉ. आर.एम. त्रिपाठी के मार्गदर्शन में आवारा, घुमंतू एवं दुर्घटनाग्रस्त पशुओं को आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लोरमी के स्वयंसेवी युवाओं के लिए सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ पशु चिकित्सालय लोरमी में किया गया।
प्रशिक्षण स्वयंसेवी युवाओं को सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले पशुओं को तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के आवश्यक तौर-तरीकों से प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण का उद्देश्य पशु चिकित्सा विभाग को स्थानीय स्तर पर सहयोग उपलब्ध कराना तथा दुर्घटनाग्रस्त पशुओं को समय पर उपचार दिलाकर उनकी जान बचाने में मदद करना है। उन्होंने बताया कि आवारा एवं घुमंतू पशुओं की बढ़ती संख्या के कारण सड़कों पर पशुओं के आने से दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। विशेषकर मानसून के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले पशुओं की संख्या बढ़ जाती है। वहीं पर्याप्त संख्या में अधिकारी-कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रत्येक दुर्घटनाग्रस्त पशु तक तत्काल चिकित्सा सुविधा पहुंचाना पशु चिकित्सा विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में प्रशिक्षित स्वयंसेवी युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
लोरमी क्षेत्र युवाओं ने पहले से ही दुर्घटनाग्रस्त एवं बेसहारा पशुओं के व्यवस्थापन और सेवा का बीड़ा उठाया हुआ है। जिसमें मयंक राजपूत, निखिल दुबे, विनायक खत्री, ओम प्रकाश राजपूत, कालेश्वर राजपूत, अंशु यादव, ओंकार राजपूत, दीनबंधु राजपूत, दिनेश राजपूत, मनीष राजपूत सहित अन्य युवा लगातार पूरी लगन और सेवा भाव के साथ इन मूक प्राणियों की सहायता करते आ रहे हैं। अब इन युवाओं को प्राथमिक उपचार का विधिवत प्रशिक्षण मिलने से दुर्घटनाग्रस्त पशुओं को तत्काल आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में और अधिक प्रभावी सहयोग मिलेगा। गंभीर रूप से घायल पशुओं को पशु चिकित्सालय तक पहुंचाने से पहले प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने में प्रशिक्षित स्वयंसेवक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।
पशु चिकित्सा सेवाए के उपसंचालक डॉ. आर.एम. त्रिपाठी ने प्रशिक्षार्थी युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए पशुओं की सेवा को मानवीय संवेदना और जिम्मेदारी से जुड़ा कार्य बताया। उन्होंने प्राथमिक उपचार में उपयोगी विभिन्न घरेलू उपायों एवं आवश्यक सावधानियों के संबंध में प्रशिक्षार्थियों से जानकारी साझा की। इस अवसर पर डॉ. प्रमोद नामदेव, पशु चिकित्सक लोरमी, डॉ. शिव पटेल, विकासखंड प्रभारी लोरमी तथा डॉ. ओम प्रकाश बघेल, पशु चिकित्सक डिण्डौरी सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी एवं प्रशिक्षणार्थी स्वयंसेवी युवा उपस्थित रहे। सात दिवसीय यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पशु कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे स्थानीय युवाओं की सेवा भावना को संस्थागत प्रशिक्षण मिलेगा और सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले पशुओं को समय पर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था और मजबूत होगी।

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