मुंगेली। नगरीय क्षेत्र से लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों तक जमीन के कारोबार और कॉलोनी विकास को लेकर लंबे समय से उठते सवाल अब प्रशासनिक कार्रवाई की रफ्तार पर भी निशाना साध रहे हैं। बीते करीब तीन वर्षों में जमीन कारोबार से जुड़े कई मामलों में नोटिस जारी होने की कार्रवाई तो हुई, लेकिन इसके आगे क्या हुआ, इसे लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। इस दौरान कई अधिकारियों के तबादले हुए और जिले में दो कलेक्टर भी बदल गए, लेकिन जमीन कारोबार से जुड़े विवादित मामलों में ठोस कार्रवाई का इंतजार बना हुआ है।
जमीन कारोबार से जुड़े मामलों में प्रशासन की यह धीमी प्रक्रिया अब चर्चा का विषय बनती जा रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि किसी कॉलोनी के विकास में नियमों की अनदेखी पाई जाती है तो जिम्मेदारी तय करने और नियमानुसार कार्रवाई करने में इतना लंबा समय क्यों लग रहा है? वहीं दूसरी ओर ऐसे स्थानों पर जमीन खरीदने वाले लोगों को आश्वासन के सहारे इंतजार करना पड़ रहा है।
स्वर्णवाटिका पर परिषद में भी उठ चुके हैं सवाल
शिक्षक नगर के समीप विकसित हो रही स्वर्णवाटिका भी बीते कुछ वर्षों में जमीन कारोबार से जुड़े मामलों के बीच चर्चा में रही है। इसके विकास को लेकर नगर पालिका के जनप्रतिनिधियों द्वारा आपत्ति और सवाल उठाए जाने की बात सामने आती रही है। परिषद की बैठकों में भी इस विकास कार्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो चुकी है। ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि संबंधित विभाग इस मामले में स्वीकृतियों, लेआउट और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं की स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करता है या नहीं।
प्लॉट से मकान तक बदला कारोबार का तरीका
लगातार उठ रहे विरोध और सवालों के बीच जमीन कारोबार के तौर-तरीकों में बदलाव दिखाई दे रहा है। अब कई जगह किसानों की जमीन काटकर सीधे प्लॉट बेचने के बजाय मकान बनाकर बेचने की दिशा में जोर दिया जा रहा है। बड़े शहरों की तर्ज पर तैयार मकान, कॉलोनी और सुविधाओं के नाम पर ग्राहकों को आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।
लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या कारोबार का तरीका बदलने के साथ नियमों का पालन भी सुनिश्चित किया जा रहा है? भवन निर्माण अनुमति, कॉलोनी विकास की स्वीकृति, सड़क, नाली, बिजली, पेयजल और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर संबंधित विभाग की निगरानी कितनी प्रभावी है, यह जांच का विषय है।
जीवनभर की कमाई लगाने वालों को न हो परेशानी
जमीन या मकान खरीदना आम आदमी के लिए महज निवेश नहीं, बल्कि जीवनभर की कमाई से जुड़ा सपना होता है। यदि कॉलोनी विकसित होने के बाद सड़क, नाली, बिजली, पानी या जल निकासी जैसी सुविधाओं को लेकर विवाद खड़ा होता है तो इसका सीधा असर खरीदारों पर पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि किसी भी परियोजना के प्रचार से पहले उसके दस्तावेज और अनुमतियों की जांच सुनिश्चित की जाए।
त्योहार आते ही प्रचार का बाजार गर्म
त्योहारी सीजन नजदीक आते ही जमीन और मकान से जुड़ी योजनाओं का प्रचार भी तेज हो गया है। आकर्षक विज्ञापनों और सुविधाओं के दावों के बीच अब असली परीक्षा प्रशासन की है। देखना होगा कि वर्षों से नोटिसों के दायरे में घूम रहे मामलों में कार्रवाई कागजों से निकलकर जमीन पर कब उतरती है और नए प्रोजेक्टों में नियमों की निगरानी किस स्तर तक होती है। कहीं ऐसा न हो कि आज बिकने वाले सपनों का हिसाब कल खरीदारों को मूलभूत सुविधाओं के संकट के रूप में चुकाना पड़े।

The News Related To The News Engaged In The Sangwari Chhattisgarh Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.